Makar Sankranti is a festival which welcomes the new year and particularly welcomes the deity Surya or Sun which provides energy and light to the world. We in Uttrakhand celebrate Makar Sankranti with great enthusiasm and it is a core part of our culture.

As I have been born in a city, I don’t know much about what Makar Sakranti actually means for us so I took little time to talk to my Mother about it and here we are. As she was telling me the story I thought it to note it down and this is what she told.

She told me in Hindi so I have written it in Hindi too. If you have any problems understanding it then please let me know and if you are from Uttrakhand and want to add something comment down below. I proudly present to you.

Uttrayani Kautik – A memoir from my mother

मकर सक्रांति यु तो पूरे देश के हर राज्य में अपने तरीकों से मनाया जाता है लेकिन हमारे उत्तराखंड यानी कुमाऊं मैं इस त्यौहार को कुछ अलग अंदाज में मनाया जाता है|

उत्तराखंड में  मकर सक्रांति को हम लोग उत्तरायणी भी बोलते हैं  क्योंकि कहा जाता है कि इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो रहे हैं यानी उत्तर दिशा की ओर  बढ़ रहे हैं|

पुराने दिनों को याद करते हुए  बहुत आनंद महसूस होता है क्योंकि आज के शहरी जीवन  ने बच्चों से उनका बचपन ही छीन लिया है कहां वह खूबसूरत  साफ-सुथरे गांव और कहां यह धूल भरे शहर. आज शहर की आबोहवा में कुछ नहीं बचा है|

बचपन में हम लोग पहाड़….अपने गांव में जाड़ों की  छुट्टियों के बीच कुछ ऐसे मनाते थे उत्तरायणी का त्यौहार पौष मास के अंतिम दिन और माघ मास  के शुरू के दिन हम सारे बच्चे मिलकर पूरी रात जागरण करते थे|

जागरण करने के लिए हम कोई ऐसा घर ढूंढते थे जहां से दूसरे लोगों को कोई परेशानी ना हो|

हमारे साथ गांव की कुछ महिलाएं हमारी बुढ़िया आमांए तथा कुछ लड़कियां जिनकी नई शादी हुई होती थी  मिलकर इंतजाम करते थे. नई दुल्हन 15 दिन पहले ही संज्ञान खाने अपने मायके आ जाती थी|

फिर हम सब बच्चे पैसे मिलाकर चीनी, चायपत्ती , गुड, मूंगफली ,भुने हुए भट्ट, और रात में पकोड़े बनाने की सामग्री का इंतजाम करते थे और जिस घर में जागरण किया जाता था,  चूल्हा जलाने के लिए लकड़ियां उनकी होती थी|

हम सारे बच्चे और बूढ़े महिलाएं 9-10 बजे इकट्ठा हो जाते थे और फिर हम भजन शुरू करते थे  और उसके बाद फिर कुमाऊनी गाने गाए जाते थे हंसी मजाक होती थी पुरानी कहानियां सुनाई जाती थी|

Uttrayani Kautik - Makar Sankranti in Uttrakhand 1

रामी बोरानी तथा राजुला मालसा की कहानियां पुस्तकों में से पढ़ी जाती थी और कुछ लोग चाय और पकौड़े का इंतजाम करने में लगे होते थे.  यह कार्यक्रम 3- 3:30 बजे तक चलता था|

इसके बाद हम सभी लोग 4:00 बजे ठंडे धारे  पर स्नान करने पहुंच जाते थे क्योंकि कहा जाता है कि रात में जागरण के बाद  धारे के ठंडे पानी में स्नान करने से गंगा स्नान का फल मिलता है.|

उसके बाद हम सभी लोग अपने अपने घर जाकर झाड़ू बुहारी लिपाई में लग जाते थे और फिर जल्दी से जल्दी गांव में जाकर गुड मांगने  लग जाते थे. यह है हमारी परंपरा. ऐसा था हमारा बचपन|

उत्तरायणी के पर्व पर बच्चे एक दूसरे के घरों में गुड मांगने जाते थे और फिर उसी गुड से घुघूत तैयार किए जाते थे|

गुड तेल और आटे से तैयार यह मीठा पकवान जाड़ों में बनाया जाता है क्योंकि यह हमारे शरीर को गर्मी प्रदान करता है.  मुझे पूरा यकीन है कि अगर आप उत्तराखंड से हैं तो आपने कभी ना कभी घुघूत जरूर खाए होंगे.|

दिन में आंगन में बैठ कर   घुघूते बनाना उनको धूप में सुखाना और फिर तल कर खाना  और उसके बाद कुछ दिनों तक दूसरों के घरों में जाकर घुघूते  खाना ऐसे मनाते थे हम मकर सक्रांति का त्यौहार, घुघुती का त्यौहार,सज्ञान का त्यौहार|

If you also did any of these things or any other, tell us in the comments section below.

Jai Devbhoomi Uttrakhand

One thought to “Uttrayani Kautik – Makar Sankranti in Uttrakhand”

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